देश के वजीर और अमीर से साधु को उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

देश के वजीर और अमीर से साधु को उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

हरिद्वार। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने परम्परा में केशव बलिराम हेडगेवार, गुरुदेव और डाॅ. मोहन भागवत जी…

हरिद्वार। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि संत शब्द अपने आप में परिपूर्ण है। देश के वजीर और अमीर से साधु को कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। क्योंकि अमीर और वजीर जो काम नहीं कर पाते, वह काम साधु कर देता है। साधु को कर्मयोगी होना चाहिए। वह दिव्य कर्म करता है। इस आयोजन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए साधु-संतों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि लगभग 100 वर्ष पुरानी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने परम्परा में केशव बलिराम हेडगेवार, गुरुदेव और डाॅ. मोहन भागवत जी जैसे राष्ट्रभक्त देश को दिये हैं संघ परिवार की सेवा, साधना, राष्ट्रधर्म, राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी परम्परा रही है। (संघ परिवार ने देश को न जाने कितने सात्विक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सांसद और विधायक दिये हैं)। साथ सामाजिक जीवन के विविध क्षेत्रों में शिक्षा, एकल विद्यालय, चरित्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण एवं राष्ट्र निर्माण से लेकर राष्ट्र आराधना की एक बहुत बड़ी सेवा की साधना संघ ने की है। कार्यक्रम में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डाॅ. महावीर अग्रवाल जी, आचार्यकुलम् के निदेशक श्री एल.आर.सैनी जी, पतंजलि योग समिति के मुख्य केन्द्रीय प्रभारी डाॅ. जयदीप आर्य जी, श्री राकेश कुमार जी, स्वामी परमार्थदेव जी, पतंजलि गुरुकुलम् के संन्यासी, आचार्य, साधु और पतंजलि विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। -साभारः अमर उजाला

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